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गोमूत्र खरीदी योजना क्या है | Gomutra Kharid Yojana 2022

Gomutra Kharid Yojana 2022: छत्तीसगढ़ राज्य सरकार मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ के पहले त्योहार ‘हरेली’के अवसर पर दुर्ग ज़िले के पाटन विकासखंड के ग्राम करसा में आयोजित कार्यक्रम में  ‘गोमूत्र खरीद योजना’का विधिवत शुभारंभ ऐलान किया। इस योजना के तहत सरकार हितग्राहियों से 4 रुपए प्रति लीटर की दर से गोमूत्र खरीदी कर रही है। इस योजना का ग्रामीण क्षेत्रों में अच्छा प्रभाव देखने को मिल रहा है। जिस तरह सरकार द्वारा किसानो से गोबर कि खरीद कर जैविक खाद बनाकर बेचा जा रहा है। उसी तरह से Gomutra Kharid Yojana के तहत हितग्राहियों से 4 रुपए प्रति लीटर की दर से गोमूत्र खरीदी कर गोमूत्र से जैविक कीटनाशक बनाकर गोठान समितियों और महिला स्व.सहायता समूहों के माध्यम से बेचा जाएगा। और छत्तीसगढ़ देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जहां गौ-मूत्र की खरीदी की शुरूआत हुई है।

Gomutra Kharid Yojana 2022 | गोमूत्र खरीदी योजना  

Gomutra Kharid Yojana 2022

गोमूत्र खरीद योजना छत्तीसगढ़ देश का पहला ऐसा राज्य है जो चार रुपये लीटर में गौ-मूत्र की खरीदी कर रहा है इंटरनेट से मिली जानकारी के अनुसार कवर्धा जिले में गोमूत्र की रिकॉर्ड खरीदी हुई है। और ऐसी जानकारी मिली है कि कवर्धा जिले में 307 लीटर गोमूत्र की खरीदी की गई है। और ये जो 307 लीटर गोमूत्र की खरीदी की गई है ये कुल 63 गांवों के गौठान से खरीदी गई है 307 लीटर गोमूत्र का हितग्राहियों को 1200 रुपए से अधिक का भुगतान किया जाएगा।  

गोमूत्र खरीदी योजना 2022  

विभागकृषि
योजना का नामGomutra Kharid Yojana
शुरू करने का श्रेयराज्य सरकार
योजना शुरू करने का तिथि28 जुलाई, 2022
लाभार्थी हितग्राहियों


Gomutra Kharid Yojana योजना के लाभ एवं विशेषताएं 

  • छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है, जो पशुपालक ग्रामीणों से दो रुपए किलो में गोबर खरीदी के बाद अब 4 रुपए लीटर में गोमूत्र की खरीदी कर रहा है।
  • उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में ‘गोधन न्याय योजना’की शुरुआत 20 जुलाई, 2020 को हरेली पर्व के दिन से हुई थी। इसके तहत गोठनों में पशुपालक ग्रामीणों से 2 रुपए किलो की दर से गोबर की खरीदी की जा रही है।
  • देशभर में गोबर की खरीदी के ज़रिये बड़े पैमाने पर जैविक खाद का निर्माण और उसके उपयोग की बेजोड़ सफलता ही गोमूत्र की खरीदी का आधार बनी है।
  • गोमूत्र खरीदी का उद्देश्य गोठानों में इससे जैविक कीटनाशक, जीवामृत, ग्रोथ प्रमोटर का निर्माण करना है, ताकि राज्य के किसानों को कम कीमत पर जैविक कीटनाशक सहजता से उपलब्ध कराया जा सके। इसके पीछे मकसद यह भी है कि खाद्यान्न उत्पादन की विषाक्तता को कम करने के साथ ही खेती की लागत को भी कम किया जा सके।
  • अब गोठानों में गोमूत्र की खरीदी कर महिला समूहों के माध्यम से इससे जैविक कीटनाशक तैयार किये जाएंगे, जिसे किसानों को रियायती दर पर उपलब्ध कराया जाएगा। इन जैविक कीटनाशकों की कीमत बाज़ार में मिलने वाले महँगे रासायनिक कीटनाशक पेस्टिसाइड की कीमत से काफी कम होगी। 
  • कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि गोमूत्र कीटनाशक, रासायनिक कीटनाशक का बेहतर और सस्ता विकल्प है। इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता, रासायनिक कीटनाशक से कई गुना अधिक होती है। खेतों में इसके छिड़काव से सभी प्रकार के कीटों के नियंत्रण में मदद मिलती है। पत्ती खाने वाले, फल छेदन एवं तना छेदक कीटों के प्रति गोमूत्र कीटनाशक का उपयोग ज़्यादा प्रभावकारी है। इसका उपयोग कृषि-पर्यावरण एवं स्वास्थ्य के लिये भी बेहतर है।

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